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सहेली हो पहेली पूछो
ो शहरी बाबू पहली भुजा
पूछो
रंग शफेद लगे रे हाथी दन्त स
मिट जाये पल भर में झूठी बात से
कोई अता पता हुनु
बगिया में खिलता नहीं हर वक़्त मिलता नहीं
सर भुरते ही पड़े बड़े बड़ों ने बोला
क्या समझे नहीं समझे हैट
ओला बर्फ का गोला
सचमुच नहीं समझे
आये रे वो सात समंदर पार से
छू जाये हम सबको बड़े प्यार से
अच्छा और छोटे तो जग हिले
हो मन में उमंग खिले
आते जाते किसी ने न देखा न टोका
क्या समझे अब भी नहीं समझे चल हट
झोंका हवा का झोंका क्या क्या
झोंका झोंका हवा का झोंका
उठा जाये तो नीला गगन चूमले
जब चाहे और जैसे चाहे घुमले
नैया के जैसे लगे नदिया के जैसे बहे
वही हमे बतलाये अब दिन है या रैना
क्या समझे बिलकुल नहीं समझे चल हट
नैन हमारे नैणा हो नैणा हमारे नैना
बहुत अच्छे
रहती है साथी की तरह साथ में
दिखती है पर आती नहीं हाथ में
अरे ऐसी भी क्या चीज है
हद से वो बढाती नहीं
सर पर भी चढाती नहीं
अपने रस्ते पे उसको कोई हटा न पाया
समझ में आया छाया छाया हो
अपनी छाया रे हा हा छाया हो अपनी छाया.
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